
बहुत समय पहले, एक घने जंगल में एक खरगोश और एक चींटी रहते थे। खरगोश अपनी तेज़ दौड़ने की क्षमता के लिए प्रसिद्ध था और जंगल के सभी जानवरों को अक्सर अपनी रफ़्तार का घमंड दिखाता था। वहीं दूसरी तरफ, चींटी अपने परिश्रम और अनुशासन के लिए जानी जाती थी।
एक दिन, खरगोश ने चींटी को पेड़ के नीचे खाना इकट्ठा करते हुए देखा और मज़ाक उड़ाते हुए बोला, “अरे चींटी, तुम इतनी मेहनत क्यों करती हो? देखो, मैं तेज़ दौड़ता हूं और आसानी से खाना जुटा लेता हूं। तुम्हें तो दिनभर काम करने के अलावा कुछ नहीं आता!”
चींटी ने शांतिपूर्वक जवाब दिया, “खरगोश भाई, मेहनत और धैर्य ही जीवन का असली आधार हैं। तेज़ दौड़ने से ही सबकुछ नहीं होता, समय पर काम करना भी ज़रूरी है।”
खरगोश हंसते हुए बोला, “धैर्य और मेहनत की बात तो तभी अच्छी लगती है, जब कोई धीमा हो। मैं जैसा तेज़ हूं, मुझे तुम्हारे जैसे ज्ञान की ज़रूरत नहीं।”
चींटी ने मुस्कुराते हुए कहा, “खरगोश भाई, क्यों न हम एक प्रतियोगिता करें? देखते हैं कि मेहनत और धैर्य ज्यादा काम आता है या सिर्फ़ तेज़ी।”
खरगोश को चींटी की चुनौती पर हंसी आ गई। उसने तुरंत हामी भर दी। प्रतियोगिता इस प्रकार तय हुई: दोनों को जंगल के किनारे से शुरू करके पहाड़ी पर बने एक बड़े पेड़ तक पहुंचना था।
प्रतियोगिता के दिन, सभी जानवर जमा हुए। खरगोश ने अपनी रफ़्तार पर विश्वास करते हुए सोचा कि यह दौड़ तो वह आसानी से जीत जाएगा। जैसे ही दौड़ शुरू हुई, खरगोश तेज़ी से दौड़ने लगा और चींटी धीरे-धीरे अपने कदम बढ़ाने लगी।
कुछ समय बाद, खरगोश ने देखा कि चींटी अभी बहुत पीछे है। उसने सोचा, “यह तो बहुत आसान है। क्यों न थोड़ा आराम कर लिया जाए?” वह एक पेड़ के नीचे आराम करने लगा और जल्द ही सो गया।
उधर, चींटी बिना रुके अपने लक्ष्य की ओर बढ़ती रही। उसने एक पल के लिए भी हार नहीं मानी। धीरे-धीरे, परिश्रम और धैर्य के साथ, वह पहाड़ी के पास पहुंच गई।
जब खरगोश की नींद खुली, उसने देखा कि सूरज ढलने वाला है। वह हड़बड़ी में दौड़ा, लेकिन जब वह पहाड़ी पर पहुंचा, तो उसने चींटी को वहां खड़ा पाया।
चींटी ने मुस्कुराते हुए कहा, “देखा खरगोश भाई, तेज़ी से कुछ नहीं होता। मेहनत और धैर्य से हर काम पूरा हो सकता है।”
खरगोश को अपनी गलती का एहसास हुआ। उसने चींटी से माफी मांगी और वादा किया कि वह भविष्य में कभी घमंड नहीं करेगा।
इस घटना के बाद, खरगोश और चींटी अच्छे दोस्त बन गए और जंगल में सभी को यह सिखाने लगे कि मेहनत और धैर्य ही असली सफलता की कुंजी है।
शिक्षा: मेहनत और धैर्य से हर लक्ष्य को पाया जा सकता है, चाहे रास्ता कितना ही कठिन क्यों न हो।
